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गुरुवार, 25 जून 2020
कविता
Image by Free-Photos from Pixabay जरा फरक थ्वड़ा सरक किले छे रुक्यूँ नि घबरा मि भी छौं चलणु तू भी चल दिदा रुकण नी झुकण नी बैठण नि चलदु रैण लड़दु रैण मि भी छौ चलणु तू भी चल दिदा युई च जीवन आलि ये मा अड़चन मिले की कंधा यूँ दगड़ी जूझन किले च घबराणी किले तू रुकी मि भी छौ चलणु तू भी चल दिदा मठु मठु हिट लै तू रस्ता च यू गुजर जालु यू फिर बैठिकि कै दिन याद करिक यू दिन हम हँसला हम मुस्कराला मान मेरी बात नि रुक दिदा मि भी छौं चलणु तू भी चल दिदा जरा फरक थोड़ा सरक किले छे रुक्यूँ नि घबरा मि भी छौं चलणु तू भी चल दिदा कविता यू ट्यूब पर भी मौजूद है... निम्न लिंक पर जाकर देख सकते हैं: © विकास नैनवाल 'अंजान' #inspiration_poem #garhwali_poem #nail
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